पुलिस प्रशासन के रोकने के बावजूद हुआ छात्रों का प्रदर्शन

क्लस्टर सिस्टम, पेपर लीक, लंबित प्रतियोगी परीक्षाओं, एनटीए को भंग करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भारी बारिश और पुलिस प्रशासन द्वारा रोके जाने की कोशिशों के बावजूद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के सदस्यों ने आज प्रदर्शन किया।

जंतर मंतर पर चल रहे कॉक्रोच जनता पार्टी के धरने और भूख हड़ताल के समर्थन में जिला स्कूल मैदान (शहीद चौक) से विशाल मार्च एवं राजभवन घेराव किया गया।

इस दौरान आइसा राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप ने कहा कि “शिक्षा और रोजगार विरोधी केन्द्र और राज्य सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन द्वारा बार-बार मार्च और घेराव को कुचलने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि छात्र झारखंड में फीस वृद्धि, शिक्षा के निजीकरण और एनईपी-2020 को लागू करने की दिशा में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी पुनर्गठन संकल्प के तहत लागू किए जा रहे क्लस्टर सिस्टम का पुरजोर विरोध करते हैं। यह व्यवस्था सेल्फ-फाइनेंस मॉडल, ऋण आधारित शिक्षा और विषय चयन की स्वतंत्रता को सीमित करती है।

उन्होंने कहा कि साथ ही इससे झारखंड की स्थानीय भाषा नागपुरी, खोरठा, कुरूख, संथाली के साथ अन्य भाषाओं की पढ़ाई और रोजगार के अवसर कम होंगे। इससे ग्रामीण, महिला, आदिवासी, दलित, पिछड़े तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की उच्च शिक्षा तक पहुंच और कठिन होगी तथा ड्रॉपआउट बढ़ेगा। यह सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर कर छात्रों को महंगे निजी संस्थानों की ओर धकेलने वाली छात्र-विरोधी नीति है। इसलिए क्लस्टर सिस्टम को तत्काल वापस लिया जाए।

इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य अध्यक्ष संदीप जायसवाल ने कहा कि “देशभर के साथ झारखंड में भी जेपीएससी, जेएसएससी, शिक्षक भर्ती से लेकर सभी परीक्षाओं में अनेक भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाएं विवादों में रही हैं।”

आइसा राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने कहा कि “केन्द्र सरकार की शिक्षा और रोजगार विरोधी नीति के कारण केन्द्र सरकार द्वारा सिविल सेवा परीक्षा, रेलवे, एसएससी में सृजित पदों पर कटौती कर बहाली प्रक्रिया रोकी गई है। वही हाल झारखंड में है जहाँ सरकारी भर्तियाँ ठप्प हैं। सभी आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर चल रही हैं। यह सम्मानजनक और स्थायी रोजगार पर सीधा हमला है। इसका समाधान जल्द होना चाहिए।”

आरवाईए के वरिष्ठ नेता सोनू पांडे ने कहा कि “केन्द्र सरकार और राज्य सरकार नियमित भर्ती एवं शैक्षणिक कैलेंडर जारी करने में विफल रही हैं। विभिन्न विभागों में भी लाखों पद रिक्त हैं। हमारी मांग है कि केन्द्र और राज्य सरकारें सभी रिक्त पदों पर समयबद्ध एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करें और नियमित भर्ती कैलेंडर जारी करें।”

आइसा राज्य सह सचिव स्नेहा महतो ने कहा कि “राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी जो देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती है, निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने में लगातार विफल रही है। पेपर लीक, अनियमितताओं और अव्यवस्था ने छात्रों का भरोसा तोड़ा है। जवाबदेही तय हो, दोषियों पर कार्रवाई हो तथा एनटीए के स्थान पर अधिक पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू की जाए।”

आइसा राज्य उपाध्यक्ष रंजीत सिंह चेरो ने कहा कि “छात्र-युवाओं के विशाल मार्च एवं राजभवन घेराव के माध्यम से क्लस्टर सिस्टम, पेपर लीक के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की गई है। वे दर्जनों छात्र-छात्राओं की मौत की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें।”

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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